
श्री कार्तिकेय जी
“मुरुगन — देवसेनापति, ज्वलंत शक्ति-वेल के धारक”
एक नज़र में
- अधिष्ठान
- युद्ध, विजय, यौवन, साधना-अनुशासन
- माता-पिता
- शिव एवं पार्वती; षड् कृत्तिकाओं का पालन
- पत्नियाँ
- देवसेना एवं वल्ली
- वाहन
- मोर; ध्वज पर मुर्गा
- पूजा दिवस
- मंगलवार; स्कंद षष्ठी; कार्तिकै दीपम
- महामंत्र
- ॐ सरवणभव नमः
- पवित्र धाम
- तमिलनाडु के छह आरुपडै वीटू
पवित्र पाठ और मंत्र
सरवणभव महामंत्र
ॐ सरवणभव नमः
Om Saravana Bhava Namaha
"सर-वन (ईख के वन) में जन्मे को प्रणाम" — पाँच अक्षर शरीर के पंच तत्वों को जागृत करते हैं; स्कंद षष्ठी पर तमिल भक्त हज़ारों बार जपते हैं।
सुब्रह्मण्य भुजंग प्रबन्ध (प्रारम्भ)
मयूराधिरूढं महावाक्यगूढं महासेव्यमानं सुरालिङ्गितोद्यत्। रुचाप्रीतये ध्यायति स्वन्तमेकं सुपुत्रं गुहं सन्ततं शरण्यम्॥
Mayuradhirudham mahavakya-gudham maha-sevyamanam sura-lingitodyat | Rucha pritaye dhyayati swantam ekam suputram guham santatam sharanyam ||
आदि शंकराचार्य ने तिरुचेंदूर में रचा, जहाँ मुरुगन बालक रूप में प्रकट होकर उन्हें दूध पिलाते थे — 'हृदय में सदा गुह (मुरुगन), मयूरारूढ़, महावाक्यों में छिपे, शरण्य का ध्यान करता हूँ।'
पूजा कैसे करें
सामान्य दैनिक पूजा
स्नान कर शुद्ध वस्त्र, पूर्व/उत्तर मुख। लाल पुष्प, कुमकुम, भस्म अर्पित करें; ॐ सरवणभव 108 बार जपें। मंगलवार को कंद षष्ठी कवचम् पाठ; वेदी पर छोटा वेल या मोर पंख रखें।
पारंपरिक अर्पण
- पंचामृतम् (केला-शहद-खजूर-घी मिश्रण)
- लाल अरळी एवं कमल पुष्प
- भस्म व कुमकुम — तीन रेखाओं में
- स्कंद षष्ठी पर पनकम (गुड़-जल)
- वेदी पर मोर पंख
व्रत के बारे में: छह-दिवसीय स्कंद षष्ठी व्रत (फलाहार/दूध) षष्ठी दिन समाप्त होता है — विघ्न-निवारण हेतु अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।
प्रसिद्ध मंदिर
🛕 Palani Dhandayuthapani Temple
Palani, Tamil Nadu
त्यागी युवा रूप का पहाड़ी धाम — 690 सीढ़ियाँ या रोपवे; यहाँ का पंचामृतम् (फल-शहद मिश्रण) प्रसिद्ध है, लाखों घर ले जाते हैं।
🛕 Thiruchendur Subramanya Swamy Temple
Thiruchendur, Tamil Nadu
समुद्र-तट मंदिर जहाँ सूरसंहार हुआ — आरुपडै वीटू में एक, अनोखा इसलिए कि पहाड़ पर नहीं, सागर किनारे स्थित है।
दर्शन का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर–नवंबर (स्कंद षष्ठी उत्सव)
🛕 Swamimalai Temple
Swamimalai, Tamil Nadu
जहाँ बाल मुरुगन ने स्वयं पिता शिव को प्रणव का अर्थ समझाया — इसलिए यहाँ इनका श्रीणिवास शिव-श्रीणिवास के ऊपर है, ऐसा एकमात्र स्थान।
🛕 Kukke Subramanya Temple
Sullia, Karnataka
जहाँ कार्तिकेय ने नाग जाति को गरुड़ से रक्षा दी — नागसर्प दोष शांति अनुष्ठानों हेतु भक्त यहाँ आते हैं।
त्योहार
🎉 Skanda Sashti
ऐप्पसि मास (अक्टूबर–नवंबर), छह दिन
सूर-युद्ध का छह-दिवसीय पुनःआवाहन — तिरुचेंदूर में सूरसंहार नाट्य; भक्त व्रत रखते, सरवणभव जपते और पहाड़ी मंदिरों की पदयात्रा करते हैं।
🎉 Thai Poosam
थाई मास, पूसम् नक्षत्र (जनवरी–फरवरी)
कावडी आटम — भक्त सजे कावड़, दूध के घड़े ढोते, कुछ गालों में वेल-आकृति भेदी के साथ नंगे पाँव पलानी/बाटू गुफाओं तक समाधिस्थ भाव में चलते हैं।