
श्री विष्णु जी
“जब-जब धर्म की हानि होती है, वे अवतरित होते हैं”
एक नज़र में
- अधिष्ठान
- सृष्टि, धर्म और ऋतु का पालन
- धाम
- वैकुण्ठ, अनन्त-शेष पर शयन
- शक्ति
- लक्ष्मी
- वाहन
- गरुड़
- पूजा दिवस
- गुरुवार; प्रत्येक एकादशी
- बीज मंत्र
- ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
- अवतार
- दशावतार (दस प्रधान अवतरण)
पवित्र पाठ और मंत्र
द्वादशाक्षर मंत्र
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
Om Namo Bhagavate Vasudevaya
"ॐ, अंतर्यामी भगवान् वासुदेव को प्रणाम" — वैष्णव परंपरा का महामंत्र, रक्षा एवं शरणागति हेतु।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती। करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
Karagre vasate Lakshmi karamadhye Saraswati | Karamule stito Brahma prabhate karadarshanam ||
"अँगूठे की जड़ में लक्ष्मी, हथेली में सरस्वती, कलाई में ब्रह्मा — प्रभात में हाथों को देखो।" ईमानदार कर्म को पूजा बताने वाली प्रातः-प्रार्थना।
पूजा कैसे करें
सामान्य दैनिक पूजा
स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण कर पूर्व मुख हों। तुलसी-दल (एकादशी/द्वादशी को तोड़ें नहीं), पीले पुष्प, चंदन अर्पित कर घी का दीप जलाएँ। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 108 बार जपें; प्रतिदिन एक गीता-श्लोक पढ़ें।
पारंपरिक अर्पण
- तुलसी-दल — भगवान का सर्वप्रिय अर्पण
- पीली वस्तुएँ: चना दाल, केला, पीले पुष्प
- पंचामृत अभिषेक (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर)
- पंजीरी या मख्खन-मिश्री
व्रत के बारे में: एकादशी व्रत (वर्ष में 24) — पूर्ण या फलाहार — वैष्णव साधना में श्रेष्ठ है; परंपरा अनुसार एकादशी की दिन-रात्रि में निद्रा भी त्याज्य है।
प्रसिद्ध मंदिर
🛕 Tirumala Venkateshwara Temple
Tirupati, Andhra Pradesh
सप्तगिरि पर विराजमान बालाजी — धरती के सर्वाधिक दर्शनीय स्थलों में से एक, प्रतिदिन लाख श्रद्धालु केश-दान के व्रत पूर्ण करते हैं।
दर्शन का सर्वोत्तम समय: पूरे वर्ष; दर्शन-स्लॉट महीनों पहले ऑनलाइन आरक्षित करें
🛕 Sri Ranganathaswamy Temple
Srirangam, Tamil Nadu
विश्व का सबसे बड़ा सक्रिय हिंदू मंदिर-परिसर — यहाँ रंगनाथ शेष पर शयन करते हैं; श्री वैष्णव परंपरा का हृदय।
🛕 Shri Jagannath Temple
Puri, Odisha
चारों धामों में से एक। वार्षिक रथयात्रा में तीन विशाल रथ सड़कों पर खिंचते हैं — रस्सी पकड़ने मात्र से मुक्ति की मान्यता है।
दर्शन का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर–फरवरी; रथयात्रा जून–जुलाई में
🛕 Badrinath Temple
Chamoli, Uttarakhand
नर-नारायण शिखरों के बीच 3,300 मीटर पर बद्रीनारायण ध्यानमग्न हैं — हिमालयी घाटियों से होकर पहुँचा जाने वाला चारधाम तीर्थ।
दर्शन का सर्वोत्तम समय: मई–जून एवं सितंबर–अक्टूबर
त्योहार
🎉 Vaikuntha Ekadashi
मार्गशीर्ष मास (दिसंबर–जनवरी)
आधी रात को मंदिरों में वैकुण्ठ द्वार खुलता है; इस एकादशी का उपवास वर्षों की तपस्या के समान कहा गया है।
🎉 Devshayani & Prabodhini Ekadashi
आषाढ़ (जुलाई) एवं कार्तिक (नवंबर)
भगवान का योगनिद्रा प्रारम्भ और समाप्ति — चतुर्मास्य की शुरुआत और समाप्ति, गहन साधना के चार पवित्र मास।