ऑल अबाउट लॉर्ड
सभी देवी-देवताओं की सूची पर वापस जाएँ
नीम करोली बाबा

नीम करोली बाबा

महाराज-जी — असीम प्रेम के संत

एक नज़र में

प्रसिद्ध नाम
महाराज-जी
काल
लगभग 1900 – 11 सितंबर 1973
मार्ग
भक्ति (प्रेम और सेवा)
प्रसिद्ध शिष्य
स्टीव जॉब्स, मार्क ज़करबर्ग, राम दास
मूल शिक्षा
"सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो"
प्रमुख आश्रम
कैंची (उत्तराखंड), वृंदावन, दिल्ली

कथाएँ और लोककथाएँ

ट्रेन से उतरे संत

कथा है कि बिना टिकट यात्रा करते हुए कंडक्टर ने उन्हें 'नीब करौरी' गाँव पर ट्रेन से उतार दिया। फिर ट्रेन आगे नहीं बढ़ी — इंजन की सारी शक्तियों से भी वह न हिली। जब संत को वापस बैठाया गया, तभी ट्रेन चली। इसी घटना से उनका वह नाम पड़ा जिससे लाखों लोग उन्हें जानते हैं।

मौखिक परंपरा

कैंची आश्रम

1964 में महाराज-जी ने नैनीताल के पास पहाड़ी घाटी में कैंची आश्रम की स्थापना की। यह स्थान हर वर्ग के साधकों का श्रद्धास्थल बन गया — गाँव वाले, सैनिक, वैज्ञानिक और बाद में पश्चिमी खोजी। आज हर जून में हज़ारों श्रद्धालु उनकी स्मृति में वार्षिक भंडारे में एकत्र होते हैं।

पश्चिम से जुड़ाव

हार्वर्ड से विदा मिलने के बाद राम दास (रिचर्ड अल्पर्ट) 1967 में भारत आए और महाराज-जी से भेंट कर अपने जीवन की दिशा पाई। दशकों बाद स्टीव जॉब्स अपनी खोज में कैंची आए, और वर्षों बाद उन्होंने यह स्थान मार्क ज़करबर्ग को सुझाया — ऐसी कथाओं ने महाराज-जी की छवि विश्व भर तक पहुँचाई।

प्रतीकों का अर्थ

🔱 चेक वाला कंबल

सबके लिए समान ऊष्मा — राजा हो या किसान, सब उसी ऊन के नीचे बैठे।

🔱 भंडारा

लोगों को खिलाना ही ईश्वर की सेवा है; उनके दरबार से कोई भूखा नहीं लौटा।

🔱 मौन और मुस्कान

उपदेश के बिना शिक्षा — प्रेम सीधे, शब्दों से परे, संचारित होता था।

रूप और अवतार

  • कंबलधारी संत

    उनकी प्रतिष्ठित छवि — चेक वाले कंबल में लिपटे, हल्की मुस्कान के साथ; भाव ही उनकी पहचान।

  • हनुमान भक्त

    हनुमान जी के जन्मजात उपासक; उनके प्रत्येक प्रमुख आश्रम में उनके द्वारा स्थापित हनुमान मंदिर है।

पवित्र पाठ और मंत्र

Prayer

महाराज-जी की मूल शिक्षा

सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो, राम का स्मरण करो

Love everyone, serve everyone, remember God (Ram)

यही तीन-सूत्री आदेश वे बार-बार देते थे। उनके लिए 'राम' केवल नाम नहीं, सब नामों के पीछे की सदा विद्यमान सत्ता थी।

पूजा कैसे करें

सामान्य दैनिक पूजा

उनकी छवि के समक्ष शांत बैठें। हो सके तो पुष्प-फल अर्पित करें। 'राम' का जप करें — सस्वर या मन ही मन। अंत में कृतज्ञता का क्षण और उस दिन किसी के लिए एक छोटा सेवा-कर्म करें।

पारंपरिक अर्पण

  • पुष्प और फल
  • हलवा या प्रसाद — दूसरों में बाँटा गया
  • शीत ऋतु में ज़रूरतमंदों को कंबल दान
  • बंदर, गाय, कुत्ते — किसी भी प्राणी को भोजन

व्रत के बारे में: भक्त प्रायः गुरुवार को व्रत के स्थान पर सेवा करते हैं — सेवा ही उनका अनुष्ठान है।

प्रसिद्ध मंदिर

🛕 Kainchi Dham Ashram

Nainital, Uttarakhand

1964 में खूबसूरत घाटी में स्थापित; 15 जून के भंडारे में हर वर्ष हज़ारों श्रद्धालु आते हैं। टेक-जगत की यात्राओं से यह विश्व प्रसिद्ध हुआ।

दर्शन का सर्वोत्तम समय: मार्च–जून; वार्षिक भंडारे के लिए 15 जून

🛕 Vrindavan Ashram

Vrindavan, Uttar Pradesh

यहीं राम दास की पहली भेंट महाराज-जी से हुई थी; यहाँ का हनुमान मंदिर नित्य उपासना का केंद्र है।

त्योहार

🎉 Annual Bhandara, Kainchi

15 जून (प्रत्येक वर्ष)

आश्रम स्थापना की स्मृति में — सामूहिक भोजन, रातभर कीर्तन और सबके लिए दर्शन।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नीम करोली बाबा कौन थे?

अत्यंत श्रद्धेय भारतीय संत (लगभग 1900–1973), जिन्हें सादगी से 'महाराज-जी' कहा जाता है — असीम प्रेम, चमत्कारी कथाओं और "सबसे प्रेम करो, सबकी सेवा करो, राम का स्मरण करो" की शिक्षा के लिए विख्यात।

सिलिकॉन वैली के संस्थापक कैंची धाम क्यों आते हैं?

स्टीव जॉब्स अपनी आत्मिक खोज में यहाँ आए और बाद में मार्क ज़करबर्ग को यह स्थान सुझाया। उनकी यात्राओं ने इस शांत हिमालयी आश्रम को विश्व-तीर्थ बना दिया।

क्या नीम करोली बाबा कोई गुरु या परंपरा बताते थे?

वे स्वयं को हनुमान जी का साधारण सेवक बताते और परंपरा के विषय में कम बोलते — उनकी प्रामाणिकता उनकी उपस्थिति थी, कोई प्रमाण-पत्र नहीं।